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Saturday, 18 July 2015

Collection of Best Funny Poems in Hindi - Hindi Hasaya Kavita, Sher O Shayari

Best funny poems in Hindi a collection of funny Hindi Poems

Radio Par Kaam Karte Mohanlal Kaale
Saptahik Sampadak Unke The Saale
Kaale Ke Lekh Chhap Te
Saale Ke Geet Gab Te
Dono Ki Tijoriyo Mein Aligarh Ke Taale

Bhasan Dene Khade Hue Matrulal Lala
Dimaag Par Na Jaane Kyon Pad Gaya Tala
Ghar Se Yaad Karke
Speech Khub Ratke
Lekin Aake Manch Par Japne Lage Mala

Saale Ki Shaadi Mein Gaye Kalkatta
Paanch Sau Rupaye Bana Liya Bhatta
Kaise Mere Piya
Jansampark Kiya
Kuch Bhi Karo Raja Tumhari Hai Satta


 Mere Gaon Ke Kutte

 He Mere Gaon Ke Param Priye Kutte 
Mujhe Dekh-Dekh Kar Chonkte Raho
Aur Jab Tak Dikhayi Padu
Bhunkte Raho, Bhunkte Raho, Mere Dost
Bhunkte Raho

Isliye Ki Main Haathi Hoon
Gaon-Bhar Ka Saathi Hoon
Bacche, Budhe, Jawaan, Sabhi Chhidakte hain Jaan
Magar Tum Khada kar Rahe Ho Virodh Ka Zhanda
Bekaar Ka Vitaanda


Vigyaan Ki Vidyaarthi Ka Aakalan


Vigyaan Ke Vidyaarthi Ka Aakalan

Best Patriotic Poems in Hindi - Colletion of hindi Desh Bhakti Kavita's and Poems

Collection of best patriotic poems in Hindi, these poems united many minds and encouraged Indian people to do any thing for the pride and glory of INDIA.

Sarfaroshi Ki Tamanna Ab Hamare Dil Mein Hai - Ram Prasad Bismil

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है


सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।

करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है ।

रहबर राहे मौहब्बत रह न जाना राह में
लज्जत-ऐ-सेहरा नवर्दी दूरिये-मंजिल में है ।

यों खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार-बार
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है ।

ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।

वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।

खींच कर लाई है सब को कत्ल होने की उम्मींद,
आशिकों का जमघट आज कूंचे-ऐ-कातिल में है ।

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।
                                               
                                       By  Ram Prasad Bismil

AA RAHI HAI HIMALAY SE PUKAR

 आ रही हिमालय से पुकार
है उदधि गरजता बार बार
प्राची पश्चिम भू नभ अपार;
सब पूछ रहें हैं दिग-दिगन्त
वीरों का कैसा हो वसंत

फूली सरसों ने दिया रंग
मधु लेकर आ पहुंचा अनंग
वधु वसुधा पुलकित अंग अंग;
है वीर देश में किन्तु कंत
वीरों का कैसा हो वसंत

भर रही कोकिला इधर तान
मारू बाजे पर उधर गान
है रंग और रण का विधान;
मिलने को आए आदि अंत
वीरों का कैसा हो वसंत

गलबाहें हों या कृपाण
चलचितवन हो या धनुषबाण
हो रसविलास या दलितत्राण;
अब यही समस्या है दुरंत
वीरों का कैसा हो वसंत

कह दे अतीत अब मौन त्याग
लंके तुझमें क्यों लगी आग
ऐ कुरुक्षेत्र अब जाग जाग;
बतला अपने अनुभव अनंत
वीरों का कैसा हो वसंत

हल्दीघाटी के शिला खण्ड
ऐ दुर्ग सिंहगढ़ के प्रचंड
राणा ताना का कर घमंड;
दो जगा आज स्मृतियां ज्वलंत
वीरों का कैसा हो वसंत

भूषण अथवा कवि चंद नहीं
बिजली भर दे वह छन्द नहीं
है कलम बंधी स्वच्छंद नहीं;
फिर हमें बताए कौन हन्त
वीरों का कैसा हो वसंत

AAG Bahut Si Baaki Hai

आग बहुत-सी बाकी है


   
भारत क्यों तेरी साँसों के, स्वर आहत से लगते हैं, 
अभी जियाले परवानों में, आग बहुत-सी बाकी है। 

क्यों तेरी आँखों में पानी, आकर ठहरा-ठहरा है, 
जब तेरी नदियों की लहरें, डोल-डोल मदमाती हैं। 
जो गुज़रा है वह तो कल था, अब तो आज की बातें हैं,
और लड़े जो बेटे तेरे, राज काज की बातें हैं, चक्रवात पर, 
भूकंपों पर, कभी किसी का ज़ोर नहीं, और चली सीमा पर गोली, सभ्य समाज की बातें हैं।

कल फिर तू क्यों, पेट बाँधकर सोया था, 
मैं सुनता हूँ, जब तेरे खेतों की बाली, लहर-लहर इतराती है।

अगर बात करनी है उनको, काश्मीर पर करने दो, 
अजय अहूजा, अधिकारी, नय्यर, जब्बर को मरने दो,
 वो समझौता ए लाहौरी, याद नहीं कर पाएँगे, 
भूल कारगिल की गद्दारी, नई मित्रता गढ़ने दो,

ऐसी अटल अवस्था में भी, कल क्यों पल-पल टलता है, 
जब मीठी परवेज़ी गोली, गीत सुना बहलाती है।

चलो ये माना थोड़ा गम है, पर किसको न होता है,
 जब रातें जगने लगती हैं, तभी सवेरा सोता है, 
जो अधिकारों पर बैठे हैं, वह उनका अधिकार ही है, 
फसल काटता है कोई, और कोई उसको बोता है।

क्यों तू जीवन जटिल चक्र की, इस उलझन में फँसता है, 
जब तेरी गोदी में बिजली कौंध-कौंध मुस्काती है।

- अभिनव शुक्ला


A Mere Pyaare Watan - Prem Dhava
 
 ऐ मेरे प्यारे वतन

ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन
तुझ पे दिल कुरबान तू ही मेरी आरजू़, 
तू ही मेरी आबरू तू ही मेरी जान

तेरे दामन से जो आए उन हवाओं को सलाम 
चूम लूँ मैं उस जुबाँ को जिसपे आए तेरा नाम 
सबसे प्यारी सुबह तेरी सबसे रंगी तेरी शाम
 तुझ पे दिल कुरबान

माँ का दिल बनके कभी सीने से लग जाता है
 तू और कभी नन्हीं-सी बेटी बन के याद आता है
 तू जितना याद आता है मुझको उतना तड़पाता है 
तू तुझ पे दिल कुरबान

छोड़ कर तेरी ज़मीं को दूर आ पहुँचे हैं 
हम फिर भी है ये ही तमन्ना तेरे ज़र्रों की कसम 
हम जहाँ पैदा हुए उस जगह पे ही निकले दम 
तुझ पे दिल कुरबान 

                                     प्रेम धवन

Kadamb Ka Pedh -  patriotic poem

कदंब का पेड़

यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।
मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे।।

ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली।
किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली।।

तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके-चुपके आता।
उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता।।

वहीं बैठ फिर बड़े मजे से मैं बांसुरी बजाता।
अम्मा-अम्मा कह वंशी के स्वर में तुम्हे बुलाता।।

बहुत बुलाने पर भी माँ जब नहीं उतर कर आता।
माँ, तब माँ का हृदय तुम्हारा बहुत विकल हो जाता।।

तुम आँचल फैला कर अम्मां वहीं पेड़ के नीचे।
ईश्वर से कुछ विनती करतीं बैठी आँखें मीचे।।

तुम्हें ध्यान में लगी देख मैं धीरे-धीरे आता।
और तुम्हारे फैले आँचल के नीचे छिप जाता।।

तुम घबरा कर आँख खोलतीं, पर माँ खुश हो जाती।
जब अपने मुन्ना राजा को गोदी में ही पातीं।।

इसी तरह कुछ खेला करते हम-तुम धीरे-धीरे।
यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।।

Monday, 13 July 2015

Sarfarpshi Ki Tamana Ab Hamare Dil Mein Hai Hindi Poem by Ram Prasad Bismil सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

Sarfaroshi Ki Tamanna Ab Hamare Dil Mein Hai Hindi Poem By Ram Prasad Bismil

Sarfaroshi ki tamanna ab hamare dil mein hai is one of the most patriotic poems in Hindi ever written it was written by Ram Prasad Bismil the Indian revolutionary and poet .

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।
करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है ।

रहबर राहे मौहब्बत रह न जाना राह में
लज्जत-ऐ-सेहरा नवर्दी दूरिये-मंजिल में है ।
यों खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार-बार
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है ।
ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।

वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।
खींच कर लाई है सब को कत्ल होने की उम्मींद,
आशिकों का जमघट आज कूंचे-ऐ-कातिल में है ।
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।

                                   राम प्रसाद बिस्मिल           

Din Jaldi-Jaldi Dhalta Hai Hindi Poem by Harivansh Rai Bachchan - Hindi Kavita | दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है! - Din Jaldi-Jaldi Dhalta hai!


हो जाय न पथ में रात कहीं,
मंज़िल भी तो है दूर नहीं -
यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

बच्चे प्रत्याशा में होंगे,
नीड़ों से झाँक रहे होंगे -
यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

मुझसे मिलने को कौन विकल?
मैं होऊँ किसके हित चंचल? -
यह प्रश्न शिथिल करता पद को, भरता उर में विह्वलता है!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

                                  हरिवंश राय बच्चन

Ho Jaye Na Path mein Raat kahi,
Manjil Bhi Toh Hai Door Nahi 
Yah Soch Thaka Din Ka Panchchi Bhi Jaldi- Jaldi Chalta hai!
Din Jaldi- Jaldi Dhalta Hai!

Bachche Pratyasha Mein Honge
Needo Se Jhaank Rahein Honge
Yah Dhyan Paro Mein Chidiya Ke Bharta Kitni Chanchalta Hai!
Din Jaldi- Jaldi Dhalta Hai!

Mujhse Milne Ko Kaun Vikal?
Main Howun Kiske Hit Chanchal?
Yah Prasn Sisil Karta Pad Ko, Bharta Ur Mein Vihalta Hai!
Din Jaldi- Jaldi Dhalta Hai!

                                By Harivansh Rai Bachchan

Best Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi - Atal bihari Ki Kavita Hindi Mein

  Atal Bihari Vajpayee ki kavitayen hindi mein padhiye, best poems of Atalji.

ऊंचाई कविता अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा

Unchchai poem by Atal Bihari Vajpayee

ऊँचे पहाड़ पर,
पेड़ नहीं लगते,
पौधे नहीं उगते,
न घास ही जमती है।

जमती है सिर्फ बर्फ,
जो, कफन की तरह सफेद और,
मौत की तरह ठंडी होती है।
खेलती, खिल-खिलाती नदी,
जिसका रूप धारण कर,
अपने भाग्य पर बूंद-बूंद रोती है।

ऐसी ऊँचाई,
जिसका परस
पानी को पत्थर कर दे,
ऐसी ऊँचाई
जिसका दरस हीन भाव भर दे,
अभिनन्दन की अधिकारी है,
आरोहियों के लिये आमंत्रण है,
उस पर झंडे गाड़े जा सकते हैं,

 किन्तु कोई गौरैया,
 वहाँ नीड़ नहीं बना सकती,
 ना कोई थका-मांदा बटोही,
 उसकी छांव में पलभर पलक ही झपका सकता है।
सच्चाई यह है कि
केवल ऊँचाई ही काफि नहीं होती,
सबसे अलग-थलग,
परिवेश से पृथक,
अपनों से कटा-बंटा,
शून्य में अकेला खड़ा होना,
पहाड़ की महानता नहीं,
मजबूरी है।
ऊँचाई और गहराई में
आकाश-पाताल की दूरी है।

जो जितना ऊँचा,
उतना एकाकी होता है, 
हर भार को स्वयं ढोता है,
चेहरे पर मुस्कानें चिपका,
मन ही मन रोता है।
जरूरी यह है कि
ऊँचाई के साथ विस्तार भी हो,
जिससे मनुष्य,
ठूंट सा खड़ा न रहे,
औरों से घुले-मिले,
किसी को साथ ले,
किसी के संग चले।

भीड़ में खो जाना,
यादों में डूब जाना,
स्वयं को भूल जाना,
अस्तित्व को अर्थ,
जीवन को सुगंध देता है।

धरती को बौनों की नहीं,
ऊँचे कद के इन्सानों की जरूरत है।
इतने ऊँचे कि आसमान छू लें,
नये नक्षत्रों में प्रतिभा की बीज बो लें,
किन्तु इतने ऊँचे भी नहीं,
कि पाँव तले दूब ही न जमे,
कोई कांटा न चुभे,
कोई कलि न खिले।
न वसंत हो, न पतझड़,
हों सिर्फ ऊँचाई का अंधड़,
मात्र अकेलापन का सन्नाटा।
मेरे प्रभु!
मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना,
गैरों को गले न लगा सकूँ,
इतनी रुखाई कभी मत देना।
                     अटल बिहारी वाजपेयी